है दलीलें तेरे ख़िलाफ़ मगर...
कौसानी में एक चाय का बाग है वहाँ. सरकारी गैस हाउस से पीछे की तरफ़ गेट से नीचे को जाएँ तो नीची को सीढ़िया उतर के चाय के खेत शुरू हो जाते हैं. इस मौसम में जाएगी तो कम लोग मिलेंगे. बारिश हुई रहती है. चाय के बाग़ान ख़ाली रहते हैं. आजकल. तू है वहाँ अकेले. मैं हूँ लेकिन कैमरे के माफिक.
एक लड़की जिसने अभी अभी साड़ी पहनना सीखा है, धीरे धीरे सीढ़ियों से नीचे उतर रही है. नीचे उतरने में एक धचका है. फिसलने वाली सीढ़ी. वो लड़खड़ाते उतरती है, कैमरा दर्ज़ कर रहा है, ’सीढ़ी पे जां मिलते ही गिरा देती है कमर के बल’
अरे अरे अरे. दायाँ हाथ अब निकालाओ मनुची बन गया है. खोज में. कि टेक मिले कहीं कोई सम्भाल दे. लेकिन वहाँ कोई है नहीं. लड़की खिलखिला के हँसती है और फिर मुस्कुराती हुई एक बाड़ का टूटा हिस्सा देख के अंदर घुस जाती है. अनार के पेड़ की पेंटिंग में लड़की अब उसके नीचे सूट पहने खड़ी है. हाथ उसका अनार आधा ही पहुँच रहा है. हथेली की पकड़ थोड़ी कसती है और अनार का रस टपकने लगता है.
कैमरा देखता है और दर्ज करता है,
मैं लंबी कविता लिखना चाहता था
तुम बस मेरे कान तक पहुँच पाती थी
उचक कर एड़ियो के बल
एड़ियों के बल, आधा अनार और पैर वापस रास्ते पे हैं. लड़की अब ढुलकती हुई आगे पहुँच गई है. दुकान है वहाँ जहाँ गार्डन की चाय मिलती है. दुकान वाला पैकेट बेचने से पहले एक कप पिलाता भी है. काश, चख के तुझे चुना जा सकता तो कितने कप पीता मैं. चाय बनते हुए पर्स से नोट निकाले जा रहे हैं गीले नोट और एक चिट्ठी, जिसने बारिश से शब्द धो दिए हैं. दुकानदार चाय चढ़ा चुका है. रंग घुल रहा है और हर मुस्कुराने और देखने के फेर में
ये रंग कुछ और गहरा हुआ जाता है
मुसलसल नहीं हुई जो तुमसे
मुलाकात याद आ रही है !
हैं दलीलें तेरे ख़िलाफ़ मगर...
दलीलों में तू है, उस गली के घर में, जिसका शहर भी मैंने देखा नहीं. तू है, जो इस तिलिस्म के बस में नहीं है क्योंकी जानती है टूट जाएगा ये. ये ताक़तवर दलील है. जादू के बाहर है जो है असल है. घर होने वाला ठहरा, दुनिया होने वाली ठहरी, दुनियादारी होने वाली ठहरी. तर्क फिर ये भी है कि हिसालू के ढँठल जैसी तेरी गर्दन में दर्द हो जाए तो एक चाय भी बनाके नहीं दे सकने वाला मैं। कभी. हालचाल पूछने से हालचाल ठीक जो हो जाने वाले ठहरे. तर्क बहुत ताकतवर है. सबसे ताक़तवर तर्क है कि क्या इस म्यूच्यूअल फंड में SIP किए जाने का कोई तुक है. इंवर्स्टमेंट होने वाला ठहरा, हिसाब होने वाला ठहरा नफा नुक़सान होने वाला ठहरा. तिलिस्म झूठा है, असल असल है. फिर भी मैं तिलिस्म के पक्ष में हूँ, क्योंकि तू सिर्फ़ तिलिस्म में है यार. तू सिर्फ़ जादू में है. इसलिए तेरे होने ना होने के बीच चुनना पड़े तो हमेशा…
तू होने वाली ठहरी, तेरा होना होने वाला ठहरा.
No comments:
Post a Comment