आंगन के गीत
कविता के लिए एक ही शब्द काफी होता है- "जैसे" , जैसे तुम!
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कमल
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Monday, February 8, 2016
अफवाह
गिरेबां से खींच के तोड़े हैं जो बटन तुमने
काज में अब भी अटकते नहीं
सुई ने सीना ही सिल दिया हो तो कोई क्या कीजे
अफवाह उड़ा रहा हूँ, तुम तक पहुंचे तो छटंकी देना
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