"कितनी ही
चम्मचें खोई है ,खाई हैं
मिर्चियां !
हर बार इक रोटी बचाई
, किसके लिये ?
किसके लिये दाने रखे, जूठे चखे, किसके लिये ?
कभी चींटी से चीनी के भी सौदे किये , जिसके लिये !!"
किसके लिये दाने रखे, जूठे चखे, किसके लिये ?
कभी चींटी से चीनी के भी सौदे किये , जिसके लिये !!"
ट्रेन जब
कभी किसी मुड़े
हुए ट्रैक पे
खुद को पलट के देखती
है, सीटी बजाती
है !|
C1 की विंडो सीट पे कहीं तुम तो नहीं ?
C1 की विंडो सीट पे कहीं तुम तो नहीं ?
यही हासिल-ए-मुलाकात
रह गया
तुम सवा हो गई मैं पौना रह गया !!
तुम सवा हो गई मैं पौना रह गया !!

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