आंगन के गीत
कविता के लिए एक ही शब्द काफी होता है- "जैसे" , जैसे तुम!
Wednesday, August 26, 2026
Friday, March 22, 2024
शहर
कुछ शहर ऐसे होते हैं
जिन पर कविताएं लिखी जाती हैं
कुछ लोग ऐसे होते हैं
जिन पर गीत लिखे जाते हैं
ये एक ऐसा ही शहर है
तुम कुछ उन लोगों में से हो
खपत
ए जिन्दगी
तू यूं भी तो गुजर ही जाएगी.
चलो! फ़कत ही सही ।
वो अरसा, वे लोग
कुछ काम की नहीं तू
सो तेरा इस्तेमाल तो न हुआ
चलो! खपत ही सही
मुलाक़ात
अदरक इलायची हो न हो
बस इक बार फ़ूंक देना
और गिरा भर देना मेरी शर्ट पे
और गिरा भर देना मेरी शर्ट पे
सब मुलाकातें एक सी नही होती
सब चाय भी नहीं
सब चाय भी नहीं
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