Monday, October 19, 2026

बालक सा मन
बच्चों का खेल
बचपने में चला आया
घर मेरा, घर मेरा

घर अपना नहीं था
जिसका था
वो कहता रहा
उतावलापन कम

बच्चे सा मन
समझ सयानों की
कहां समझता कुछ
सोचा नहीं, बोल दिया

बोल दिया वो भी
जो कहने वाले को
ख़ुद नहीं पता था
कि कहा सकता है

रोना इसके बाद आया
जब पता चला
खेल बच्चों के
सयाने खेल नहीं होते

सयाना रोता है
घर के लिए नहीं
आंसू बहते हैं
बच्चे की मृत्यु पर

Wednesday, August 26, 2026

तेरे हाथ

पीठ से चिपका लूंगा
पंख उगा लूंगा धीरे धीरे
उड़कर आऊंगा
तुझे लौटाने तेरे हाथ

Monday, April 1, 2024

चाय का अच्छा बहाना था जुकाम का लाइलाज होना
जरा जोर से फ़ूको के इत्ती दूर से असर नहीं आता
और सब मैने डीलीट कर दिया है इन्बाक्स से
एक ही तो मेसेज है इन्त्जारी, मगर नहीं आता
डाटा पैक मे बस चन्द एमबी ही बचे हैं इलाही
पर फ़ेसबुक पे आनलाएन कोई नजर नहीं आता

Friday, March 22, 2024

बर्फ

तेरे ख़याल की तासीर ने रोक रखी थी शायद 
तेरे जाने के बाद 
उस शहर में 
बर्फ पड़ी 
इस बार 
सुना है 

आदत

दो सिरो पे दिन सुलगता है
हर सांस एक बुरी आदत है 

शहर

कुछ शहर ऐसे होते हैं 
जिन पर कविताएं लिखी जाती हैं
कुछ लोग ऐसे होते हैं
जिन पर गीत लिखे जाते हैं 
ये एक ऐसा ही शहर है
तुम कुछ उन लोगों में से हो

खपत

ए जिन्दगी
तू यूं भी तो गुजर ही जाएगी.
चलो! फ़कत ही सही ।
वो अरसा, वे लोग
कुछ काम की नहीं तू
सो तेरा इस्तेमाल तो न हुआ
चलो! खपत ही सही