Wednesday, August 26, 2026

तेरे हाथ

पीठ से चिपका लूंगा पंख उगा लूंगा धीरे धीरे उड़कर आऊंगा और फिर तुझे लौटाने तेरे हाथ

Monday, April 1, 2024

चाय का अच्छा बहाना था जुकाम का लाइलाज होना
जरा जोर से फ़ूको के इत्ती दूर से असर नहीं आता
और सब मैने डीलीट कर दिया है इन्बाक्स से
एक ही तो मेसेज है इन्त्जारी, मगर नहीं आता
डाटा पैक मे बस चन्द एमबी ही बचे हैं इलाही
पर फ़ेसबुक पे आनलाएन कोई नजर नहीं आता

Friday, March 22, 2024

बर्फ

तेरे ख़याल की तासीर ने रोक रखी थी शायद 
तेरे जाने के बाद 
उस शहर में 
बर्फ पड़ी 
इस बार 
सुना है 

आदत

दो सिरो पे दिन सुलगता है
हर सांस एक बुरी आदत है 

शहर

कुछ शहर ऐसे होते हैं 
जिन पर कविताएं लिखी जाती हैं
कुछ लोग ऐसे होते हैं
जिन पर गीत लिखे जाते हैं 
ये एक ऐसा ही शहर है
तुम कुछ उन लोगों में से हो

खपत

ए जिन्दगी
तू यूं भी तो गुजर ही जाएगी.
चलो! फ़कत ही सही ।
वो अरसा, वे लोग
कुछ काम की नहीं तू
सो तेरा इस्तेमाल तो न हुआ
चलो! खपत ही सही 

मुलाक़ात

अदरक इलायची हो न हो 
बस इक बार फ़ूंक देना
और गिरा भर देना मेरी शर्ट पे
सब मुलाकातें एक सी नही होती
सब चाय भी नहीं