आंगन के गीत
कविता के लिए एक ही शब्द काफी होता है- "जैसे" , जैसे तुम!
Monday, April 1, 2024
Friday, March 22, 2024
शहर
कुछ शहर ऐसे होते हैं
जिन पर कविताएं लिखी जाती हैं
कुछ लोग ऐसे होते हैं
जिन पर गीत लिखे जाते हैं
ये एक ऐसा ही शहर है
तुम कुछ उन लोगों में से हो
खपत
ए जिन्दगी
तू यूं भी तो गुजर ही जाएगी.
चलो! फ़कत ही सही ।
वो अरसा, वे लोग
कुछ काम की नहीं तू
सो तेरा इस्तेमाल तो न हुआ
चलो! खपत ही सही
मुलाक़ात
अदरक इलायची हो न हो
बस इक बार फ़ूंक देना
और गिरा भर देना मेरी शर्ट पे
और गिरा भर देना मेरी शर्ट पे
सब मुलाकातें एक सी नही होती
सब चाय भी नहीं
सब चाय भी नहीं
Thursday, March 14, 2024
शायद!
शायद!
कप होंटों से लगाते हुए कहा उसने
जब पूछा मैंने,
ग्रुप डिलीट कर दिया तुमने?
ऐसी कई बातें थी उस ग्रुप में
जो ग्रुप नहीं एक युग्म था
शायद!
काफी शायद!
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